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मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

• मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना 19 फरवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राजस्थान के सूरतगढ़ से शुरू की गई।

• स्वस्थ धरा,खेत हरा’ के आदर्श वाक्य के साथ प्रधानमंत्री ने इसका शुभारंभ किया था।

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा शुरू की गयी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के द्वारा देश-प्रदेश के किसानों को मिटटी की गुणवत्ता का अध्ययन करके एक अच्छी फसल प्राप्त करने में सहायता मिल रही है।

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• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2015 में ‘मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना’ की शुरुआत कृषि क्षेत्र में मिट्टी की सेहत पर ध्‍यान देने का आह्वान किया, ताकि उत्‍पादकता बढ़ाई जा सके और समृद्धि लाई जा सके। ‘स्‍वस्‍थ धरा, खेत हरा’ का नारा दिया। भारत ने मृदा स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण काम करके दुनिया के कई देशों को एक रास्ता दिखाने का काम किया है। पूरे विश्व में मिट्टी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की जरूरत न सिर्फ अच्छी मिट्टी और अच्छे फसल के लिए है बल्कि अच्छे पर्यावरण के लिए भी इसकी बहुत जरूरत है।

• मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (#SHCs) बेहतर मृदा की दिशा में एक पहल है जो केन्द्र सरकार द्वारा किसानों को अपनी फसल की पैदावार क्षमता बढ़ाने के लिए शुरू की गई।

• मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों के लिये वरदान साबित हो रही है। कार्ड में उर्वरकों की फसलवार प्रबंधन की जानकारी मुहैया कराई जाती हैं और इसके साथ ही किसानों को यह भी बताया जाता है कि कृषि‍ भूमि की उर्वरा क्षमता को किस प्रकार बढ़ाया जा सकता है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उद्देश्य

• मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उद्देश्य देश के किसानों को उनकी मृदा का अध्ययन करके मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करना है, जिसकी सहायता से किसानों को अपने खेतों की मिट्टी के स्वास्थ्य अनुसार फसल लगाने में मदद मिलेगी।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मुख्य लक्ष्य मृदा स्वास्थ्य में सुधार हेतु किसानों को मृदा की वास्तविक स्थिति को बताना है जिससे संपोषणीय कृषि • को बढ़ावा दिया जा सके।

• मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रत्येक तीन वर्ष के चक्र में एक बार जारी किए जाएंगे।

• यह योजना कृषि एवं सहकारिता विभाग की देखरेख में भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है।

• कृषि संबंधी गतिविधियां उन्नत मिट्टी पर ही निर्भर करती है। क्योंकि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो किसान स्वस्थ रहेगा और फसल की पैदावार भी उन्नत किस्म की होगी। अतः देश की मिट्टी को सुजलाम-सुफलाम बनाने के उद्देश्य से आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2015 में राजस्थान की पावन धरा से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत की। साथ ही वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा। आपको यह जानकर हर्ष होगा कि राजस्थान में किसानों को अब तक 1 करोड़ 16 लाख से ज्यादा मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इस योजना के तहत कृषकों को उनके खेत की मिट्टी की पूरी जानकारी दी जाती है। जैसे भूमि में कितनी-कितनी मात्रा किन-किन पोषक तत्वों की है तथा कौन-कौनसे उर्वरक किसानों को अपने खेत में उपयोग करना चाहिए। हम सबको खुशी इस बात की है कि सरकार की इस सकारात्मक पहल से फसल की पैदावार बढ़ी है तथा प्रदेश के किसान भाई-बहन अब खुशहाल व समृद्ध नजर आने लगे हैं।

• खेतों में देसी उर्वरक का प्रयोग,जो मिट्टी की उपज बढ़ाए। उच्च गुणवत्ता युक्त होगा अनाज,जो शरीर को स्वस्थ बनाए। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अंतर्गत आइए हम सब मिट्टी की उपज क्षमता को जाने तथा परीक्षण के ज़रिए मृदा स्थिति का आकलन करके इसमें पोषक तत्वों की कमी को दूर करें। #PMFBY #PMFBY4Farmers

• उपजाऊ मिट्टी खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है साथ ही मृदा की उर्वरता खाद्यान्न उत्पादन से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। इसलिए यह आवश्यक है कि मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने के भरसक प्रयास किए जाएं। वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करके मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखा जा सकता है साथ ही मिट्टी के कटाव को कम करना जरूरी है।

• मृदा स्वास्थ्य परीक्षण का काम पहले व्यक्तिगत रूप से किसानों के खेतों में किया जाता रहा है, लेकिन हमारी पिछली सरकार के वक्त में कृषकों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने का कार्य प्रारंभ किया और प्रदेश में सॉइल की टेस्टिंग शुरू हुई थी। जिसके अच्छे परिणाम सामने आये एवं किसानों को विभिन्न फसलों का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली। आइये विश्व मृदा दिवस पर इस वर्ष की थीम “मिट्टी को जीवित रखना, मिट्टी की जैव विविधता की रक्षा करना” की दिशा में जागरूकता लाएं। #WorldSoilDay

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